लाओत्सु की अद्भुत घटना

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अगर कोई बच्चा पीछे देखने लगे तो क्रांति घट जाती है इसलिए कथा कहती है कि लाओत्सु बुढा पैदा हुआ क्योंकि वह पीछे देखता हुआ पैदा हुआ कुछ बच्चे पैदा होते हैं जो पीछे देखते पैदा होते हैं ऐसे ही बच्चों ने तो दुनिया को यह खयाल दिया कि अनेक— अनेक जन्म हैं पीछे जो बच्चे पीछे देखते पैदा होते हैं, वही तो खबर लाते हैं इस दुनिया में कि पहले और भी जन्म हुए हैं

हम नये नहीं हैं, आगंतुक नहीं हैं, बहुत पुराने हैं, प्राचीन जिनको पिछले जन्मों की स्मृति रह जाती है, वे बच्चे पीछे देखते पैदा होते हैं जो बच्चा पीछे देखता पैदा होता है, अनूठा है जो जवान आगे —पीछे देखने में समर्थ होता है, वह अनूठा है क्योंकि जवान तो सिर्फ क्षण को देखता है जो है अभी। कर लो, गुजर लो, जो होगा होगा, देखा जाएगा जवान तो वर्तमान में अंधा होता है

जो जवान आगे —पीछे देखने लगे, उसके जीवन में विवेक का जन्म होता है और जो का आगे देखने लगे, वह मृत्यु के पार हो जाता है, अमृत को पा लेता है देखने की क्षमता तो वही है, दिशा बदलो बुढ़ापे में बच्चे जैसे हो जाओ यही तो जीसस कहते हैं कि जो बच्चों जैसे हैं वे उपलब्ध हो जाएंगे प्रभु को यही तो अष्टावक्र कहते हैं, बालवत हो जाओ। क्या मतलब है? यह बालवत शब्द के इतने मतलब हैं कि जिसका हिसाब नहीं उन बहुत मतलबों में एक मतलब यह भी है—अलग — अलग बार मैं अलग— अलग मतलब तुमसे कहता हूं, क्योंकि वह सब मतलब इस छोटे से शब्द में समाए हैं यह भी मतलब है —बच्चे जैसे हो जाओ अगर कोई का बच्चे जैसा हो जाए तो उसका अर्थ हुआ, का आगे देखने लगा। पीछा तो गया, गया सो गया बिसर! सो बिसरा, अब उसको क्या समेटना? अब वह आगे देखने लगा अगर कोई का बच्चे —जैसा आगे देखने लगे तो मौत के पार देख लेगा, अमृत को उपलब्ध हो जाएगा अगर कोई बच्चा के —जैसा पीछे देखने लगे तो वह जन्म के पार देख लेगा
और अतीत जन्मों की स्मृति को उपलब्ध हो जाएगा अगर कोई जवान आगे—पीछे देख ले तो वासना—मुक्त हो जाएगा, संन्यस्त हो जाएगा आगे —पीछे देख ले तो पाएगा, क्या रखा है? न पीछे कुछ था—जब तुम छोटे बच्चे थे तो वासना का क्या मूल्य था? महत्वाकांक्षा का क्या मूल्य था?

धन का क्या मूल्य था?

पद—प्रतिष्ठा का क्या मूल्य था?

अगर जवान पीछे देख ले और आगे देख ले —एक दिन फिर कुछ मूल्य न रह जाएगा, फिर मौत आएगी सब पोंछ जाएगी—न पहले कुछ मूल्य था, न आगे कुछ मूल्य है, तो अभी मूल्य कैसे हो सकता है! तो धोखा हो रहा है क्रांति घटती है जब तुम सामान्य से हटकर कुछ करने में सफल हो जाते हो

ओशो

अष्‍टावक्र: महागीता–(भाग–6) प्रवचन–86