भय से निपटने के लिए ध्यान विधि

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प्रत्येक रात 40 मिनट तक अपने भय को जिओ!

कमरे में बैठ जाओ, लाइट बंद कर लो और भयभीत होने लगो। सभी तरह की डरावनी बातों के बारे में, चीजों के बारे में सोचो – भूत और राक्षस, और सभी तरह की बुरी आत्माएं, और जो भी तुम कल्पना कर सकते हो, करो। उनकी उत्पत्ति करो, बुलाओ उनको। कल्पना करो कि वे तुम्हें घेरकर तुम्हारे चारों ओर नाच रहे हैं, और तुम पर झपटने का प्रयत्न कर रहे हैं।

वास्तव में हिल जाओ। अपनी कल्पना के एकदम चरम पर पहुंच जाओ – वे तुम्हारी हत्या कर रहे हैं, वे तुम्हारा बलात्कार करने का प्रयास कर रहे हैं, वे तुम्हारा दम घोंटकर मार डालना चाहते हैं – कल्पना करो।

और, एक या दो नहीं, बल्कि वे बहुत सारे हैं, और वे हर तरफ से तुम्हारे ऊपर अपने कारनामे कर रहे हैं। जितना संभव हो, उतनी गहराई से डर जाओ – और जो कुछ भी घटित होता है, उसे देखते रहो। जागे रहो भीतर।

अपने बचपन में तुमने भय का बहुत दमन किया है, और व्यर्थ ही तुम बहादुर बनने का प्रयास करते रहे हो। तुम हमेशा भय के विरोध में रहे हो, इसलिए तुमने डींग हांकते हुए झूठा दिखावा किया है। लेकिन एक मुखौटा मात्र है यह, गहरे में तुम अभी भी एक छोटे बच्चे के समान भयभीत हो।

इस झूठे मुखौटे को उतार फेंको, और फिर से बच्चे बन जाओ, भयभीत और कांपते-थरथराते हुए।

इस ध्यान को हरेक रात को कम से कम सप्ताह भर जारी रखो। और, दूसरी चीज, किसी भी समय जब भी भय उत्पन्न हो, उसे स्वीकार करो। उसे अस्वीकार हरगिज मत करो। यह न सोचो कि यह भय कुछ गलत है, और तुम कायर या डरपोक हो, और इस भय को पराजित करना हो – ऐसी बात मन में लाओ ही मत। यह बिल्कुल स्वाभाविक है!

इस भीतर दबे पड़े भय को पूरी तरह स्वीकार करने से और रात में पूर्णता के साथ इसे अभिव्यक्त करने से वस्तुस्थिति बदलने लगेगी, तुम भय को मिटते और विलीन होते देखने लगोगे!

ओशो

‘डोंट बाइट माई फिंगर’ प्रवचनमाला