ज्ञान की उपलब्घि

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मैंने सुना है कि एक आदमी ज्ञान को उपलब्ध हो गया। खलबली मच गई शैतान के शिष्यों में। क्योंकि जब भी कोई ज्ञान को उपलब्ध होता है तो शैतान के व्यवसाय पर चोट पड़ती है। शिष्य भागे, उन्होंने अपने गुरु शैतान को कहा कि कुछ करो, जल्दी कुछ करो। एक आदमी ज्ञान को उपलब्ध हो गया है। देखते हो, पृथ्वी पर उस वृक्ष के नीचे बैठा कैसा प्रकाशित हो रहा है, कैसा ज्योतिर्मय! वह हमारे सारे धंधे को चौपट कर देगा।

शैतान ने कहा: तुम फिक्र मत करो, जब तक पुजारी हैं और पंडित हैं, तब तक हमें कोई भी चिंता नहीं। तुम जरा ठहरो। हमें कुछ बीच में पड़ने की जरूरत नहीं, जल्दी ही पंडित और पुजारी उसके आसपास इकट्ठे हो जायेंगे। जल्दी ही मंदिर बनेगा। जल्दी ही शास्त्र रचा जायेगा। जल्दी ही धर्म का जन्म हो जायेगा। बस, पंडे-पुजारी हमारे साथ हैं। तो ऐसे एकाध-दो कभी जो बुद्ध हो जाते हैं इनकी चिंता न लो। इनकी रोशनी को ढांकने के लिए पंडित और पुजारी काफी हैं।

सहजयोग -18

ओशो