केवल जीओ!

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केवल जीओ

रात्रि घनी हो गयी है और आकाश तारों से भरा है, हवाओं में आज सर्दी है और शायद कोई कहता था कि कहीं ओले पड़े हैं, राह निर्जन है और वृक्षों के तले घना अंधेरा है, और इस शांत शून्य-घिरी रात्रि में जीना कितना आनंदमय है!होना मात्र ही कैसा आनंद है, पर हम ‘मात्र जीना’ नहीं चाहते है!

हम तो किसी आदर्श के लिए जीना चाहते हैं, जीवन को साधन बनाना चाहते हैं, जो कि स्वयं साध्य है! यह आदर्श दौड़ सब विषाक्त कर देती है, यह आदर्श का तनाव सब संगीत तोड़ देता है!इसीलिए केवल जीओ! जीवन से लड़ो मत, छीना झपटी न करो, चुप होकर देखो, क्या होता है! जो होता है, उसे होने दो, जो है उसे होने दो, अपनी तरफ से सब तनाव छोड़ दो और जीवन को बहने दो! जीवन को घटित होने दो और जो घटित होगा, मैं विश्वास दिलाता हूँ! वह मुक्त कर देता है!

आदर्श का भ्रम सदियों पाले गये अंधविश्वासों में से एक है, जीवन किसी और के लिए नही, कुछ और के लिए नहीं, बस जीने के लिए है! इसीलिए कहता हुँ कि किसी क्षण केवल जीकर देखो !!

~ओशो