शराब के नशे में श्रेष्ठतम का चुनाव

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मुल्ला नसरुद्दीन अपने मित्र पंडित रामचरणदास के साथ बैठा हुआ है। चर्चा चल रही है। दोनों शराब पी रहे हैं। जब नशा थोड़ा गहरा हो गया, तो पंडित रामचरणदास ने कहा कि “नसरुद्दीन, अगर तुम्हें एक एकांत निर्जन द्वीप पर महीने भर अटक जाना पड़े, नाव डूब जाये, कोई कारण हो जाये, या तुम्हें भेज दिया जाये, तो तुम अपने साथ क्या ले जाना पसंद करोगे? श्रेष्ठतम चीज कौन-सी है, जिसे तुम अपने साथ ले जाना पसंद करोगे? व्हाट डू यू कनसीडर दि बेस्ट? नसरुद्दीन ने कहा “साफ है कि मैं पूरी मधुशाला, पूरे गांव की मधुशाला अपने साथ ले जाना पसंद करूंगा।’

“और पंडितजी, आप अगर ऐसी हालत में उलझ जायें’, नसरुद्दीन ने पूछा, “तो आप क्या करेंगे? आप क्या ले जाना पसंद करेंगे?’ पंडित रामचरणदास ने थोड़ा झिझकते हुए कहा, “हेमामालिनी!’

वे इतना ही कह पाये थे कि नसरुद्दीन ने जोर से घूंसा मारा टेबल पर; टेबल उलट दी और कहा कि “गलत! स्टिक टु दि टर्म्स। यू सेड दि बेस्ट, नॉट दि वेरी बेस्ट। शर्त पर बंधे रहो। तुमने कहा था श्रेष्ठ, सबसे श्रेष्ठ नहीं, नहीं तो हम ही हेमामालिनी को न ले जाते!’

महावीर वाणी, भाग-२,

प्रवचन#४५, 

ओशो