प्रेम और मृत्यु

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जिसके सामने मृत्यु समर्पण करती है !!

प्रेम एकमात्र तत्व है, जिससे मृत्यु हारती है; जिसके सामने मृत्यु समर्पण करती है। इसे समझना। इसीलिये जिसका हृदय प्रेम से भरा है उसके जीवन में भय विसर्जित हो जाता है। क्योंकि सभी भय मृत्यु का भय है। और जिसके जीवन में भय है उसके जीवन में प्रेम का अंकुरण नहीं हो पाता। भयभीत व्यक्ति धन इकट्ठा करेगा, पद-प्रतिष्ठा की खोज करेगा; लेकिन प्रेम से बचेगा। प्रेमी सब लुटा देगा प्रेम के ऊपर, सब निछावर कर देगा–पद भी, प्रतिष्ठा भी, धन भी, जरूरत पड़े तो जीवन भी। सिर्फ प्रेम ही जानता है, जीवन का समर्पण भी किया जा सकता है । क्योंकि प्रेम को पता है कि जीवन के बाद भी एक और जीवन है; कि जीवन को छोड़कर भी शाश्वत जीवन शेष ही रह जाता है।

ओशो 

सहज-योग-प्रवचन